हम तो मोहब्बत करेगा…इस दुनिया से नहीं डरेगा…ये बोल हैं किशोर कुमार के बहुत ही प्यारे गाने के। किशोर कुमार सच में अपने जीवन में भी ऐसे थे। अपने गानों के जरिए जीवन भर प्यार बांटते रहे। भारतीय सिनेमा को अपनी दमदार गायिकी और अभिनय के जरिए नई उचाईयों पर पहुंचाने वाले किशोर कुमार का आज मर कर अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा हैं।

मध्यप्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे आभास कुमार गांगुली, अपने ज़माने के मशहूर अभिनेता दादा मुनि उर्फ़ अशोक कुमार के छोटे भाई थे। किशोर दा घर में सबसे छोटे थे और बताया जाता है कि वह बचपन से ही बहुत नटखट और शरारती थे। वह कॉलेज के दिनों में कैंटीन से उधार लेकर खाना और दोस्तों को खिलाना बखूबी जानते थे। बॉलीवुड में उनके कैरियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म ‘शिकारी’ से हुई। इस फिल्म में ‘किशोर दा’ ने अभिनय किया था। इसके बाद उन्हें 1957 में बनी फ़िल्म “फंटूश” से पहचान मिलनी शुरू हुई। फंटूश में उन्होंने ‘दुखी मन मेरे, सुन मेरा कहना’ गीत गा कर श्रोताओं और दर्शकों का मन मोह लिया था। उन्होंने उस समय के सभी बड़े संगीतकारों के साथ काम किया और बतौर गायक उनकी बेहतरीन गायकी का आगाज हो गया। जनता उनके गाए गीतों की तेजी से फैन होते गई। 

उन्होंने उस समय के हर बड़े अभिनेता के लिए गाने गाये। देवानंद और खास कर राजेश खन्ना पर उनकी आवाज बहुत ज्यादा पसंद की गई इसलिए हर बार काका अपनी फिल्म में गाने के लिए निर्देशकों से किशोर को गाना गवाने के लिए बोलते थे। तभी तो राजेश खन्ना के अभिनय में ज्यादातर हिट गाने किशोर कुमार ने ही गाये हैं और कहीं न कहीं काका की सफलता के पीछे किशोर दा के गीत भी शामिल हैं। बाद में जब अमिताभ सुपर स्टार बने तो उनकी इस कामयाबी में किशोर दा के गाए गीतों का भी एक बड़ा हाथ था। किशोर कुमार अपनी आवाज अमिताभ बच्चन के साथ ऐसे मिला देते थे कि लगता था कि परदे पर फिल्माए गानों में अमिताभ की आवाज  ही महसूस  होती थी।

किशोर दा ने चार शादियां की उन्होंने पहली शादी रूमा देवी से की जो ज्यादा दिनों तक नहीं चली और जल्दी ही दोनों का रिश्ता टूट गया, दूसरी शादी अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला से की। लेकिन मधुबाला भी उनका साथ न निभा पाईं और शादी के नौ साल बाद वह दुनिया को अलविदा कह गईं, तीसरी शादी उन्होंने योगिता बाली से की इनसे भी कुछ ही महीनों में तलाक हो गया फिर उन्होंने लीना चंद्रावरकर से चौथी शादी की। किशोर दा मजाक में अपनी पत्नियों को बंदरिया कह कर पुकारते थे क्योंकि उनकी चारों पत्नियां बम्बई के बांद्रा की रहने वाली थी।

किशोर कुमार ना सिर्फ गायिकी में अव्वल थे बल्कि अदाकारी में भी उनका कोई जवाब नहीं था। फिल्म ‘पड़ोसन’ में उनका निभाया हुआ किरदार शायद ही कोई भूल पायेगा। ऐसे ही हाफ टिकट, चलती का नाम गाड़ी, प्यार किए जा, किशोर कुमार की ऐसी फिल्में हैं जिन्हें हमेशा देखा जाएगा। किशोर कुमार गाना भी डूब कर गाना जानते थे। फिल्म ‘डॉन’ में ‘खइके पान बनारस वाला’ गाने के लिये किशोर दा ने बाकायदा पान खा कर गाना गाया था।

किशोर कुमार की आवाज का जादू आज भी लोगों के सिर चढ़ कर बोलता है। बेहतरीन गीतों के लिए उन्हें आठ बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया। इतनी सफलता के बाद भी वह जमीन से जुड़े रहे, उन्हें अपनी मातृ भूमि खंडवा से बहुत प्यार और लगाव था वह अक्सर अपने कार्यक्रम में खंडवा को याद करना नहीं भूलते थे। सन 1987 में 13 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उनके जन्म स्थान खंडवा में किया  गया। 

किशोर कुमार के गाए कुछ गाने जो आज भी दिलों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं….

दुखी मन मेरे कहना ….फंटूश

हम तो मोहब्बत करेगा….दिल्ली का ठग

गाता रहे मेरा दिल….गाईड

ये दिल ना होता बेचारा…ज्वैल थीफ

मेरे सपनों की रानी…आराधना

आते जाते खूबसूरत….अनुरोध

मैं प्यासा तुम सावन ….फरार

https://www.youtube.com/watch?v=4xf2BoBM8hs

आए तुम याद मुझे…मिली

खईके पान बनारस वाला…डॉन

इस दुनिया से जाने के बाद भी किशोर आज युवा दिलों की धड़कन बने हुए हैं। भारत के फिल्मी गायकों से जुड़े एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि किशोर कुमार के चहेते हर उमर के लोग रहें हैं। आज के रीमिक्स के दौर में किशोर कुमार के गाए गीतों का ही सबसे ज्यादा रीमिक्स किया गया है। बहराहल किशोर दा भले ही आज हमारे बीच ना हों….पर जब भी उनके गाने बजते हैं तो चाहने वालों के दिलों में किशोर कुमार फिर से जिंदा हो उठते हैं। 

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