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गुजरात चुनाव के दूसरे दौर का प्रचार आज खत्म हो गया। ऐसे में  गुजरातवासी कल का दिन (बुधवार) अगर शांति दिवस के रूप में मनाए तो कोई हैरानी की बात नहीं। दरअसल, इस पूरे चुनावी प्रचार में न विकास था, न गुजरात। अगर था तो सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का दौर और बेतरतीब भाषणबाजी । भाजपा अब तक कांग्रेस से 60 सालों का हिसाब मांग रही थी तो वहीं कांग्रेस गुजरात में भाजपा से 22 सालों का हिसाब मांग रही है। इसी हिसाब के गुणा-गणित में ‘नीच’ से लेकर ‘शाह-जादे’ तक की राजनीति गर्मायी। लेकिन खास बात यह रही कि दोनों ही पार्टियों के नेताओं को आखिरी दिन भी भगवान जरूर याद आए। एक ओर जहां पीएम मोदी सी प्लेन में बैठकर अंबाजी के दर्शन किए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में अपना माथा टेका।

इस बार के गुजरात चुनाव प्रचार ने अपनेआप में एक इतिहास रच दिया। गुजरात की पूरी विकास ‘जातिगत’ राजनीति में समा गई। हालांकि इस पूरे चुनाव प्रचार में कई नेता पीछे से भी काफी मेहनत कर रहे थे लेकिन कई नेता दिखाई भी नहीं दिए। खासकर सोनिया गांधी अपने स्वास्थ्य के चलते शायद इस बार गुजरात चुनाव में राहुल का साथ नहीं दे सकीं। लेकिन काग्रेंस के कई कद्दावर नेता गुजरात में जुटे थे। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी गुजरात में अपना पैर जमाए हुए थे। यहां तक की दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री भी गुजरात चुनाव प्रचार में पीएम मोदी का साथ दे रहे थे। देखिए इस बार के गुजरात चुनाव की कुछ खास बातें-

  1. मंदिर हो या मस्जिद चाहे वो अयोध्या का हो या गुजरात का आजकल का चुनावी बिगुल यहीं से बजता है। गुजरात चुनाव में भी यही हुआ। एक तरफ जहां पीएम मोदी ने गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान कई मंदिरों के दर्शन किए तो वहीं राहुल गांधी ने भी रिकॉर्ड तोड़ते कई मंदिरों में माथा टेका।
  2. गुजरात चुनाव में कांग्रेस की प्रचार टीम इस बार काफी अलग दिख रही थी। ऊपर से राहुल गांधी भी अपने भाषण में काफी परिपक्व दिख रहे थे। उन्होंने बीजेपी को घेऱने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। ‘विकास पागल हो गया’ और शाह-जादे जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके जनता के सामने कांग्रेस ने काफी पब्लिसटी बटोरी।
  3. पीएम मोदी का कार्यक्षेत्र होने के बावजूद इस बार पीएम मोदी को गुजरात चुनाव में काफी मेहनत करनी पड़ी। यहां तक की भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने गुजरात में कई बड़ी रैलियों का शुभांरभ किया और जनता से डोर-टू-डोर जाकर भेंट की। इस तरह की कोशिश कांग्रेस के मजबूत रुख को दिखाता है।
  4. राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव में ट्वीटर का बड़ा अच्छा इस्तेमाल किया। उन्होंने पीएम मोदी से गुजरात के विकास के बारे में हर रोज एक प्रश्न पूछने का निश्चय किया और उन्होंने अब तक 14 प्रश्न पीएम मोदी से पूछे हैं।
  5. इसके अलावा चुनाव में विवादास्पद बयानों और तथ्यों की बौछार भी देखने को मिली। राहुल गांधी के मना करने के बावजूद आखिरी दिनों में मणिशंकर अय्यर ने पीएम को नीच कहा जिससे उनको पार्टी से निकाल दिया गया। तो वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस का संबंध पाकिस्तान से जोड़ दिया।
  6. इस बार का गुजरात चुनाव विकास के मुद्दे पर कम, जातिगत राजनीति पर ज्यादा लड़ी गया। उसकी सबसे बड़ी वजह पाटीदार आंदोलन था। यही नहीं ऊना की घटना ने भी पिछड़ी जातियों को एकत्रित करने का काम किया। मीडिया में भी गुजरात के इंफ्रास्ट्रक्चर की बात नहीं बल्कि किस क्षेत्र में कितने ओबीसी, दलित और सवर्ण हैं यह बात चलने लगी। ऊपर से पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की सेक्स सीडी भी सरे बाजार राजनीति कर रही थी।
  7. चुनाव प्रचार से पहले ही कांग्रेस गुजरात चुनाव पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे रही थी। गुजरात चुनाव की तारीखों में हो रही देरी की वजह वो भाजपा को ठहरा रही थी। यहां तक की उसने राज्य चुनाव आयोग पर भी कई गंभीर आरोप लगाए।
  8. गुजरात चुनाव में जीएसटी और नोटबंदी का मुद्दा बड़े ही जोर-शोर से उठाया गया। राहुल गांधी खुद व्यापारियों से मिलने उनके घर तक पधारे। उन्होंने छोटे-बड़े सभी व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी परेशानी जानी। साथ ही भाजपा को डूबते अर्थव्यवस्था पर जमकर घेरा।
  9. गुजरात चुनाव सियासी दलों के लिए प्रतिष्ठा की बात हो गई है। इस चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि जो मोदी लहर 2014 के बाद से छाया है, अगर उसे कस के रोकना है तो कांग्रेस के लिए गुजरात चुनाव जीतना बड़ा ही आवश्यक है। ऊपर से भाजपा के लिए जीतना यह वैसे भी आवश्यक है क्योंकि इस मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी कई सालों से खेलते आए हैं।
  10. अगर देखा जाए तो कुल मिलाकर 22 सालों बाद बीजेपी को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलती हुई नजर आ रही है। ऊपर से पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, ओबीसी नेता अल्पेश ठाकुर और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस के ही साथ हैं। ऐसे में अगर भाजपा के साथ कोई खड़ा है तो वो है पीएम मोदी का ‘विकास’ जो कि गुजरात का चुनावी मुद्दा बना ही नहीं ।
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