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असम में साल 2021 से अब जिन भी लोगों के 2 से ज्यादा बच्चे होंगे उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। राज्य में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए सोमवार को सोनोवाल कैबिनेट की बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया। फैसले के मुताबिक केवल नौकरी देते वक्त ही इस बात को ध्यान में नहीं रखा जाएगा बल्कि नौकरी के अंत तक इस बात का ध्यान रखा जाएगा की जो व्यक्ति सरकारी नौकरी कर रहे हैं उन्हें 2 से ज्यादा बच्चे ना हो नहीं तो उन्हें नौकरी से निकाला भी जा सकता है।

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असम सरकार के फैसले के मुताबिक, दो से अधिक बच्चों वाले लोग सरकार की तरफ से दिए जाने वाले अन्य कई फायदों से भी वंचित हो जाएंगे। इसमें ट्रैक्टर देने, आवास मुहैया कराने और अन्य लाभकारी सरकारी योजनाएं शामिल हैं। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद असम जनसंपर्क विभाग की ओर से इस फैसले के संबंध में एक बयान भी जारी किया गया है।

इस बार 15 अगस्त के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लाल किले के प्राचीर से बढ़ती जनसंख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर काबू करने की जरुरत है। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए सोचना होगा। पीएम मोदी ने कहा था कि सीमित परिवार से परिवार के साथ देश का भी भला होगा।

सोनोवाल कैबिनेट की बैठक में नई भूमि नीति को भी मंजूरी दी गई जिससे भूमिहीन लोगों को तीन बीघा कृषि भूमि और एक मकान बनाने के लिए आधा बीघा जमीन मिलेगी।

दरअसल, पिछले तीन दशक से बहस जारी है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए क्या-क्या प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। 1991 में सीनियर कांग्रेस नेता के. करुणाकरण के नेतृत्व वाली कमिटी ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में जो सुझाव दिए थे, उसमें जनप्रतिनिधियों के लिए यह शर्त अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया था कि उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हों। लेकिन वह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका।

हालांकि, टुकड़ों-टुकड़ों में कुछ राज्यों ने पंचायत स्तर पर इसकी कोशिश जरूर की। उसी रिपोर्ट से इनपुट लेते हुए मोदी सरकार ने भी कानून मंत्रालय को इस दिशा में बेहतर कानून के विकल्प तलाशने को कहा है।

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