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हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी मर्डर केस की जांच में जुटी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मंगलवार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कमलेश तिवारी के आरोपी हत्यारे 34 वर्षीय शेख अशफाक हुसैन और 27 साल के मोइनुद्दीन पठान को एटीएस ने मंगलवार को राजस्थान-गुजरात बॉर्डर से गिरफ्तार किया। अशफाक और मोइनुद्दीन दोनों सूरत के रहने वाले हैं, एक एमआर है तो दूसरा फूड डिलिवरी बॉय है।

इससे पहले गुजरात से ही गिरफ्तार किए गए अन्य तीन आरोपियों मौलाना मोहसिन, राशिद पठान ओर फैजान को लखनऊ कोर्ट में पेशी हुई, जहां से तीनों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

वहीं कमलेश तिवारी की हत्या में बड़ा खुलासा हुआ है। कमलेश तिवारी की अटॉप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि हत्यारों ने वारदात के दौरान कम से कम 15 बार तिवारी पर चाकू से वार किया था और एक गोली मारी गई थी। खास बात है कि चाकुओं के सभी 15 वार सिर्फ जबड़े से लेकर छाती के बीच में 10 सेंटीमीटर के भीतर किया गया है।  कमलेश तिवारी के सीने और जबड़े पर चाकुओं से वार किया गया और फिर गला रेत दिया गया। इसके बाद चेहरे पर एक गोली भी मारी गई। सिर के पीछे हिस्से में 32 बोर की गोली फंसी मिली है। यानी कमलेश तिवारी की बड़ी बेरहमी से हत्या की गई थी।


बता दें कि 18 अक्टूबर को लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी। आरोपी मिठाई के एक डिब्बे में चाकू लेकर आए थे।

हिंदू समाज पार्टी के स्थानीय नेता ने बताया कि अशफाक ने रोहित सोलंकी के नाम से फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर हिंदू नेता कमलेश तिवारी से दोस्ती की तथा मिलने का वक्त भी तय किया। तिवारी ने उसे 18 अक्टूबर को मिलना तय किया था और उसी दिन उनकी हत्या कर दी गई। इससे पता चलता है कि हत्यारों ने कमलेश तिवारी की वास्तविक लोकेशन के साथ फर्जी आईडी से मिलने का वक्त भी मुकर्रर कर ली थी। घटना के बाद से अशफाक के साथ फरीद उर्फ मोइनुद्दीन भी फरार हो गए थे। फरीद इस हत्याकांड के मुख्य साजिश कर्ता रशीद खान पठान का छोटा भाई है। मौलाना मोहसिन और रशीद ने इनको हत्या के लिए उकसाया था।

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