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पुणे की कोथरुड सीट पर लड़ाई ब्राह्मण बनाम मराठा हो गई है। महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के विरुद्ध यहां राज ठाकरे की मनसे ने मराठा किशोर शिंदे को उम्मीदवार बनाया है। मनसे के पक्ष में NCP ने अपने खाते में आई इस सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है जिससे ये लड़ाई वन टू वन हो गयी है। हांलकि, पाटिल के लिए राहत की बात ये है कि स्थानीय ब्राह्मण महासभा ने उनके पक्ष में खड़े रहने की घोषणा कर दी है।

साल 2014 में कोथरुड से बीजेपी की मेधा कुलकर्णी विधायक बनी थीं। लेकिन बीजेपी ने इस बार उनका टिकट काट कर पाटिल को दिया है। इससे ब्राह्मण नाराज थे। मगर बीते तीन दिनों में पाटिल ने इन संगठनों से बातचीत कर इन्हें मना लिया है। पाटिल ने माना कि मेधा कुलकर्णी के साथ टिकट बंटवारे में अन्याय हुआ है, लेकिन जीत के बाद उन्हें अहम जिम्मेदारी दी जाएगी।

उन्होंने ब्राह्मण महासभा से वादा किया कि उनकी हर समस्या को दूर किया जाएगा। इसके बाद सभी ब्राह्मण संगठनों ने मनसे के एनसीपी-कांग्रेस समर्थित मराठा उम्मीदवार शिंदे के विरुद्ध अपना समर्थन पाटिल को देने का निर्णय लिया है।

उधर, यहां प्रभाव के बावजूद शिवसैनिक यह सीट बीजेपी के खाते में जाने से नाराज हैं और उद्धव ठाकरे से कह चुके हैं कि वे इस बार मनसे को समर्थन देंगे। उद्धव के लिए इन लोगों को मनाना कठिन चुनौती है। इस बीच पाटिल को बाहरी बताते हुए भी उनका विरोध हो रहा है।

मगर पाटिल ने लोगों को याद दिलाया कि वे पुणे के जमाई हैं। पाटिल ने यहां किराए पर मकान भी लिया है जिससे स्थानीय लोगों के साथ वो घुल मिल सकें। पाटिल ने कहा, मैंने उनसे कहा है कि लिखित में शिकायतें और समस्याएं दें, मैं खुद उन्हें देखूंगा।

साल 2009 में बनी कोथरुड सीट पर सबसे पहले शिवसेना ने कब्जा किया था लेकिन, साल 2014 में यहां मेधा कुलकर्णी ने शिवसेना उम्मीदवार को 60 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। तब मनसे के किशोर शिंदे चौथे स्थान पर रहे थे।

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