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बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी है। कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, अधवारा, महानंदा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले टापू बने हुए हैं।

बिहार की राजधानी पटना में सड़के समंदर बनीं हुई हैं, जिसके कारण पूरा जनजिवन अस्त व्यस्त है। लोग घर में रहने को मजबूर है, स्कूल, कॉलेज बंद है। राज्य में आफतकाल का माहौल बना हुआ है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण लोगों को हेलीकॉप्टर से राशन दिया जा रहा है।

बिहार में आई बाढ़ पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेतुका बयान दिया है। नीतीश ने कहा कि ये स्थिति किसी के हाथ में नहीं होती, ये आपदा प्राकृतिक है। मौसम विभाग भी सुबह कुछ कहता है और दोपहर में कुछ होता है। पीने का साफ पानी मुहैया कराने के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं।

वहीं पीएम मोदी ने नीतीश सरकार को हर संभव मदद देने को कहा है। फिलहाल, बाढ़ से अब तक 40 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन सरकार करे भी तो क्या? वहीं बिहार सरकार के मंत्री जहां इसे नक्षत्रों का खेल बता रहे हैं। तो वहीं एक तरफ इस आफतकाल से बचने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि उन्‍होंने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर नीतीश कुमार से बात की है। विभिन्‍न एजेंसियां स्‍थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित लोगों की मदद कर रहीं हैं। इसमें केंद्र सरकार सभी संभव सहायता देने को तैयार है।

 

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