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कांग्रेस नेताओं के लिए बेहद बुरे दिन चल रहे है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कर्नाटक में कांग्रेस के संकटमोचक नेता माने जाने वाले डी के शिवकुमार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सीबीआई शिकंजा कसने की तैयारी में है। हरीश रावत पर सीबीआई की सख्ती के कारण कांग्रेस की भी मुश्किलें बढ़नी तय हैं।

हरीश उत्तराखंड और केंद्र स्तर पर कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं। अभी सीबीआई ने हाईकोर्ट के सामने मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। ऐसे में अचानक उन पर सीबीआई की कार्रवाई होने से कांग्रेस को बड़ा नुकसान होगा। खासतौर पर, उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के लिहाज से कांग्रेस पार्टी की तैयारियों को बड़ा झटका लगेगा। यहां पंचायत चुनाव का बिगुल अब कभी भी बजने वाला है। रावत जैसे बड़े चेहरे की घेरेबंदी का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

हरीश रावत पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के साथ असम प्रभारी का जिम्मा रहा है। वह विस चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बुरी तरह हारने के बाद भी लगातार सक्रिय थे। राज्यभर में मूवमेंट के साथ ही लगातार छोटे-छोटे आयोजन कर वह जनता के बीच कांग्रेस के लिए माहौल बनाने में जुटे हुए थे।

सीबीआई ने आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर गहरी और लंबी जांच के बाद फंदा कस लिया। वर्ष 2016 से जांच कर रही सीबीआई ने इतने सबूत जुटा लिए हैं कि हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर कर सके। सीबीआई के इस मजबूत फंदे की पहली कड़ी 29 अप्रैल 2016 को प्रारंभिक जांच शुरू होने के साथ जुड़ी।

इसके बाद सीबीआई हरीश रावत के स्टिंग मामले में हर कड़ी को जोड़ती गई। इस मामले से जुड़े हर शख्स की कुंडली तैयार की गई। इसके बाद सीबीआई ने हरीश रावत से 24 मई और 26 दिसंबर 2016 को पूछताछ की। तब उनसे करीब पांच पांच घंटे कई सवाल जवाब किए गए थे। हरीश रावत इनमें से ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 21 अगस्त 2019 को नैनीताल हाईकोर्ट में इस मामले की जांच पूरी होने की रिपोर्ट दे दी।

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