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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसके खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लेने शुरू कर दिए हैं। योगी सरकार ने 7 पीपीएस अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। अधिकारियों को भ्रष्टाचार की वजह से हटाया गया है। सभी अफसर डिप्टी एसपी और सीईओ पद पर तैनात थे। योगी सरकार ने कुछ अधिकारियों को बर्खास्त भी किया है।

इससे पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने बड़ा एक्शन लेते हुए सात प्रांतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दे दी थी।

पीपीएस अधिकारियों में 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा के सहायक सेनानायक अरुण कुमार, अयोध्या के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनोद कुमार राणा, आगरा के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह राना, 33वीं वाहिनी पीएसी झांसी के सहायक सेनानायक रतन कुमार यादव, 27वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर के सहायक सेनानायक तेजवीर सिंह यादव, मुरादाबाद के मंडलाधिकारी संतोष कुमार सिंह, 30वीं वाहिनी पीएसी गोण्डा के सहायक सेनानायक तनवीर अहमद खां को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है।

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देखा जाए तो पिछले 2 सालों में योगी सरकार विभिन्न विभागों के 200 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर चुकी है। इन दो सालों में योगी सरकार ने 400 से ज्यादा अफसरों, कर्मचारियों को निलंबन और डिमोशन जैसे दंड भी दिए हैं। इस कार्रवाई के अलावा 150 से ज्यादा अधिकारी अब भी सरकार के रडार पर हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुस्त कर्मचारियों और अधिकारियों को उम्र से पहले रिटायर करने का ऐलान पिछली जुलाई में किया था। सरकार ने 50 साल की उम्र में ही सुस्त अधिकारियों को रिटायरमेंट देने का फैसला किया था। इस मामले में सरकार ने शासनादेश जारी कर कहा था कि ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की लिस्ट तैयार करने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस में रिटायरमेंट का कोई कारण नहीं बताया जाएगा। तीन महीने का नोटिस पीरियड रहेगा। उसके बाद ऐसे अधिकारियों को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लिया जाएगा।

केंद्र की मोदी सरकार ने भी पिछले तीन साल में कई अधिकारियों को कंपलसरी रिटायरमेंट दिया है। इनमें करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारी शामिल हैं।

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