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राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय समिति ने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में ही जीएसटी को शामिल करने का सुझाव दिया है। असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति ने जीएसटी परिषद को सूक्ष्म एवं लघु उधोग के उत्पादों के एमआरपी में ही जीएसटी को शामिल करने का सुझाव दिया।

समिति ने कहा कि किसी भी वस्तु का एमआरपी उसकी अधिकतम कीमत है और इससे अधिक कीमत पर वस्तु को बेचना अपराध होता है। इसलिए सरकार यह स्पष्ट करे कि एमआरपी में ही जीएसटी शामिल है। दरअसल कुछ उपभोक्ताओं ने समिति से शिकायत की थी कि कई दुकानदार वस्तुओं के एमआरपी पर भी जीएसटी ले रहे हैं। इस शिकायत और अनियमितता के मद्देनजर इस उच्च स्तरीय समिति ने सरकार को चीजें स्पष्ट करने का सुझाव दिया है।

सूत्रों के मुताबिक समिति ने जोर देकर कहा कि यह नियम रेस्तरां, ढाबों और बोतलबंद एवं डिब्बाबंद उत्पादों पर अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए। इसके अलावा समिति ने सुझाव दिया कि जब दुकानगार उपभोक्ताओं को रसीद दें तो जीएसटी एमआरपी में ही शामिल रहे।

इस समिति ने रिटर्न दायर करने में देरी पर लगने वाले शुल्क को भी प्रतिदिन 100 रुपए से कम कर के 50 रुपए करने का सुझाव दिया। उसने सभी करदाताओं को तिमाही के आधार पर ही रिटर्न दायर करने की सुविधा देने का भी सलाह दिया। इसके अलावा इस समिति ने सभी टैक्‍स देने वालों को रिटर्न तिमाही भरने की सुविधा देने की भी सिफारिश की है। गौरतलब है कि अब तक 1.5 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले कारोबारी ही तिमाही रिटर्न फाइन करने की सुविधा पाते हैं।

समिति के इन सभी सुझावों पर आगामी 10 नवंबर को गुवाहाटी में होने जा रही जीएसटी परिषद की बैठक में विचार किए जाने की संभावना है। इस बैठक की अध्‍यक्षता वित्तमंत्री अरुण जेटली करेंगे।

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