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सुप्रीम कोर्ट ने आधार लिंकिंग पर अंतरिम राहत मांगने वाली अर्ज़ियों पर शुक्रवार (15 दिसंबर) को आदेश देते हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबर और ज़रूरी सेवाओं को आधार से लिंक करने की मियाद 31 मार्च 2018 तक बढ़ा दी है। हालांकि आधार स्कीम की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 17 जनवरी से सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी योजनाओं के लिए यह डेडलाइन बढ़ाई है। बैंक खातों को आधार से लिंक कराने की अंतिम तारीख को भी 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है लेकिन नए बैंक खाता खोलने के लिए ग्राहक को आधार देना जरूरी होगा और अगर आधार फिलहाल नहीं बना है तो ऐसे में आधार के लिए कराया गया एनरोलमेंट देना होगा।

गुरुवार (14 दिसंबर) को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई थी और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया था कि बैंक खातों समेत सभी योजनाओं के लिए सरकार ने आधार जोड़ने की अंतिम तारीख को 31 मार्च करने का फैसला ले लिया है। लेकिन नए बैंक खाते के लिए आधार अनिवार्य है। मोबाइल नंबर से आधार जोड़ने की डेडलाइन कोर्ट के आदेश से ही 6 फरवरी, 2018 तक है लेकिन इसे कोर्ट खुद आदेश जारी कर बढ़ा सकता है।

दूसरी ओर आधार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम, केटीएस तुलसी, श्याम दीवान और मीनाक्षी अरोडा ने अपनी दलीलें कोर्ट के सामने पेश की।  इनमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए था कि आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा और यह सिर्फ पीडीएस, एलपीजी, मनरेगा, पेंशन आदि 6 योजनाओं में लागू किया जाएगा लेकिन सरकार ने कोर्ट के इस आदेश के बावजूद आधार को 139 योजनाओं के लिए जरूरी कर दिया। यहां तक की CBSE ने बोर्ड परीक्षा के लिए, मिड डे मील  के लिए , UGC की स्कॉलरशिप के लिए, मजदूरों के पुनर्वास के लिए और तो और HIV पीड़ित से इलाज के लिए भी आधार नंबर मांगा जा रहा है।

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