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सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय को 6 महीने के अंदर व्यापक नीति और दिशा-निर्देश बनाने को कहा है। देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर दायर पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मानव संसाधन मंत्रालय से इस मामले को गंभीरता से देखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय 6 महीने के अंदर व्यापक नीति और दिशा-निर्देश बनाएं। जो दिशा-निर्देश और नियम बनाए जाएंगे उसमें सरकारी और निजी दोनों ही तरह के स्कूल शामिल होंगे। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने ये आदेश जारी किया।

गुरुग्राम के स्कूल में मासूम प्रद्युम्न की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रद्युम्न के पिता ने पीआईएल दाखिल की थी। वकील आभा शर्मा की ओर से भी एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक नीति बनाई जानी चाहिए…ज्यादातर स्कूलों में सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट इस बारे में एक आदेश जारी करे ताकि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा बेहतर तरीके से हो सके।

याचिका में मांग है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए जो वर्तमान में सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं उन्हें लागू किया जाए। उनके साथ ही स्कूल प्रबंधनों की भी जिम्मेदारी तय की जाए। जैसे ही बच्चे स्कूल बसों या वाहनों से स्कूलों में पहुंचते हैं, उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

पिछली सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों ने कहा था कि वो भी बच्चों की सुरक्षा के लिए गाइडलाइन देना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

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