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त्रिपुरा की एक महिला के पास इलाज का पैसा नहीं होने के कारण उसकी 7 माह की बच्ची को तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से एक दंपती को बेच दिया। इसके कारण बालिका के पिता की  आत्महत्या कर लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य की उनोकोटि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

उनोकोटि जिले के कुमारघाट स्थित फटिकरॉय प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में नर्स प्रभा रानी दास ने इस आशय के गंभीर आरोप लगाये हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के कर्मचारी रहे उनके पति द्वैपायन चक्रवर्ती ने यह सुनने के दो दिन बाद ही आत्महत्या कर ली कि उसकी बेटी को बेच दिया गया है। प्रभा के मुताबिक उसकी इकलौती बेटी प्रतिति को चार माह पूर्व दिल की बीमारी पाये जाने के बाद सीएमसी वेल्लोर रेफर किया गया था। बालिका को 1.5 लाख रुपये की लागत से होने वाले ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया था लेकिन ऑपरेशन के बाद होने वाली समस्याओं के नाम पर इलाज का बिल 15 लाख रुपये पर पहुंच गया।

प्रभा ने संवाददाताओं से कहा,“ हम इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं कर सकते थे और अस्पताल के अधिकारी हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे थे। एक बार तो उन्होंने हमारे ऊपर बीमार बालिका के माता-पिता नहीं होने का भी आरोप लगाया। हमने हालांकि उन्हें बेटी के जन्म के सभी कागजात दिखाए थे। उन्होंने बेटी को घर ले जाने के लिए हमें घर वापस जाने और पैसे का इंतजाम करने के बाद ही वापस लौटने को कहा। अगले दिन से उन्होंने हमें अपनी बेटी से मिलना बंद कर दिया और जब हमने उन्हें मजबूर किया तो उन्होंने हमें उसके साथ रहने की अनुमति दी।”

इस बीच, अस्पताल प्राधिकरण एक जोड़े को लाया जो प्रतिति के माता-पिता होने का दावा कर रहा था। साथ ही उन्होंने द्वैपायन और प्रभा पर बालिका चोरी करने का आरोप लगाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके तुरंत बाद ही तमिलनाडु पुलिस कार्रवाई में जुट गयी और दंपती को उनकी बेटी (प्रतिति) को अस्पताल में छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रभा ने दावा किया कि त्रिपुरा पहुंचने के बाद वह इस मामले को मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव, पुलिस महानिदेशक, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और त्रिपुरा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के सामने भी उठाया लेकिन उसकी गुहार से किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।  इस बीच, द्वैपायन को पिछले हफ्ते अस्पताल प्राधिकरण से एक नोटिस मिला जिसमें उन्हें तमिलनाडु में उनके खिलाफ दायर मामले के संबंध में उनसे मिलने के लिए कहा गया था। प्रभा ने कहा,“ चार फरवरी को, जब मैं ड्यूटी से आई तो मैंने देखा कि द्वैपायन बेडरूम के अंदर छत से लटका हुआ है। सुसाइड नोट में हमारे कष्टों की व्यथा का वर्णन किया गया है, जो अब पुलिस के पास है। हम पिछले कुछ दिनों में पूरी तरह से टूट चुके हैं।”

त्रिपुरा बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष नीलिमा घोष ने पीड़ित महिला के दावे को स्वीकार करते हुए कहा कि वह बालिका को बचाने की कोशिश कर रही हैं और लगभग एक महीने पहले द्वैपायन को संबंधित अस्पताल में उचित परामर्श के बाद बेटी को वापस लाने के लिए भेजा गया था। आयोग को सूचित किया कि उसे बालिका को वापस देने के बजाय उसे स्थानीय थाने में बुलाकर परेशान किया गया। घोष ने कहा,“ हम चुप नहीं बैठे हैं। प्रीति को बचाया जाएगा और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। दुर्भाग्यवश हमने द्वैपायन को खो दिया।” बहरहाल इन आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी दावपेंच के बीच प्रतिति अपनी मां से मिलने का अस्पताल में इंतजार कर रही है।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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