Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

जून तक बिहार में कोरोना का प्रकोप नियंत्रित दिख रहा था। लेकिन जुलाई में अचानक से मामलों में तेजी आई। राज्य में संक्रमितों की संख्या तीस हजार के करीब पहुंच गई है। और हर दिन मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। वर्तमान में जैसे हालात हैं, उसमें और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना के कहर के बीच राज्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में भी है। ऐसे में कोरोना और बाढ़ का असर चुनावी तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। अभी तक मतदाता सूची को अपडेट करने। और नए वोटर का नाम जोड़ने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।

हालांकि, चुनाव आयोग तय समय पर चुनाव की संभावना तलाश रहा है। सभी दलों से बातचीत का सिलसिला जारी है। बातचीत की प्रक्रिया पूरी होने और सभी दलों की राय लेने के बाद ही चुनाव आयोग इस पर अंतिम फैसला लेगा। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को पूरा हो रहा है। कानूनी संविधान संसद को विधानसभा का कार्यकाल एक साल और फिर छह महीने के लिए बढ़ाने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 172 के तहत ऐसा किया जा सकता है। मगर ये तभी किया जा सकता है जब आपातकाल लगा हो। महामारी या किसी अन्य परिस्थिति के मद्देनजर विधानसभा का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में अगर विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव नहीं कराए जा सके तो फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का ही विकल्प बचता है।

 

 

वैसे, चुनाव की चर्चा करें तो अभी बिहार की राजनीति कोरोना के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। NDA जहां कोरोना के दौरान बेहतर व्यवस्था और गरीबों को अनाज देने की बात प्रमुखता से उठा रहा है। तो वहीं, विपक्ष वक्त रहते सही कदम ना उठाने और कोरोना बढ़ने के लिए सरकार की लापरवाही को मुद्दा बना रही हैं। इन सब मुद्दों के बीच वोटों के धुव्रीकरण में अहम भूमिका निभाने वाले फैक्टर भी काम कर रहे हैं। आरजेडी जहां माय यानी मुस्लिम-यादव समीकरण के अलावा युवा वोटरों पर निगाह रखे हुए है। तो वहीं, जेडीय़ू महादलित वोटरों को लुभाने में जुटी है। शराबबंदी और महिला आरक्षण के जरिए महिलाओं को भी पाले में लाने का प्रयास हो रहा है। इसी तरह बीजेपी को उम्मीद है कि, आर्थिक आधार पर 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण का जो लाभ केंद्र सरकार ने दिया है। उससे उसका कोर वोट बैंक और मजबूत होगा।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.