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देर रात लद्दाख की गलवान वैली में.. भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प हुई.. इसमें भारत के कर्नल रैंक के एक कमांडिंग ऑफिसर और दो जवान शहीद हो गए.. भारत की जवाबी कार्रवाई में भी चीन के 5 सैनिक मारे गए.. जबकि, 10 से ज्यादा घायल हुए.. तनाव के बाद चीन ने खुद पहल की और मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे से ही बैठक की मांग की.. इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के मेजर जनरल के बीच मीटिंग शुरू हुई.. हालांकि, चीन अपनी चालबाजी की आदत ये यहां भी बाज नहीं आया.. चीन ने भारत के बारे में बयान जारी किया.. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा  कि भारतीय सैनिकों ने गालवन घाटी में दो बार घुसपैठ की। हमने भारत से अपना विरोध दर्ज कराया है। भारत अब कोई एकतरफा कार्रवाई न करे जिससे कि बॉर्डर पर हालात और बिगड़ जाएं। दोनों देशों को बातचीत से मसला हल करना चाहिए।

मिली जानकारी के मुताबिक, तमाम बातचीत के बाद भी चीन के सैनिक गलवान घाटी से हटने को तैयार नहीं थे.. भारतीय सैनिक चीनी जवानों को सोमवार रात से पीछे धकेल रहे थे.. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच खूनी झड़प हो गई.. जिसका भारतीय जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया.. चीन से बढ़ रहे तनाव और गलवान घाटी में हुई झड़प के तुरंत बाद.. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, तीनों सेनाओं के प्रमुख और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच बैठक हुई। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को घटना की पूरी जानकारी दी और ताजा हालात से अवगत कराया।

बीते पांच हफ्तों से गलवान घाटी में बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने खड़े हैं.. हाल ही में, दोनों देशों ने तय किया था कि चीन की सेना गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 ए से पीछे हटेगी.. उसने धीरे-धीरे पीछे हटना शुरू किया था, लेकिन पूरी तरह से पीछे नहीं हटी थी।

आखिर क्या है दोनो देशों के बीच का विवाद

भारत औऱ चीन के बीच विवाद का प्रमुख केंद्र बनी गलवान घाटी विवादित क्षेत्र अक्साई चीन में है.. गलवान घाटी लद्दाख़ और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित है.. यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) अक्साई चीन को भारत से अलग करती है.. ये घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख़ तक फैली है.. ये क्षेत्र भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख़ की सीमा के साथ लगा हुआ है.. 1962 की जंग के दौरान भी गालवन नदी का ये क्षेत्र जंग का प्रमुख केंद्र रहा था..

इसी तरह पैंगोंग सो झील 1962 के बाद से ही सुर्खियों में रही है.. 1962 में चीन ने इसी इलाके में भारत पर मुख्य हमला बोला था.. अगस्त 2017 में पैंगोंग सो के किनारे भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे.. झील की भौगौलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है.. ये चुशुल अप्रोच के रास्ते में पड़ता है.. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन अगर भविष्य में कभी भारतीय क्षेत्र पर हमले की हिमाकत करता है तो चुशुल अप्रोच का इस्तेमाल करेगा क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व है.. 134 किलोमीटर लंबी ये झील 604 वर्ग किलोमीटर के दायर में फैली हुई है.. पैंगोंग झील तिब्बत से लेकर भारतीय क्षेत्र तक फैली है.. इसका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है.. इसके 89 किलोमीटर यानी करीब 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है.. झील के 45 किलोमीटर पश्चिमी हिस्से यानी करीब एक तिहाई हिस्से पर भारत का प्रभुत्व है..

चीन ने रणऩीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों में बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार किया है.. उसे उसे उन दुर्गम इलाकों तक आसान पहुंच देते हैं.. वहीं, भारत ने भी हाल के दिनों में यहां निर्माण कार्य में तेजी दिखाई है.. और यही बात चीन को खल रही है।

चीन बनना चाहता है दुनिया का दादा

इस बीच स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट  से खुलासा हुआ है कि दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है.. दोनों देश पुराने हथियारों को खत्म कर रहे हैं.. यही वजह है कि पिछले साल एटमी हथियारों की संख्या में कमी देखी गई.. हालांकि, फिक्र की बात ये है कि पुराने की जगह ये दोनों देश नए एटमी हथियार बना रहे हैं.. चीन और पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार हैं.. मौजूदा वक्त में चीन के पास 320,  पाकिस्तान के पास 160 परमाणु हथियार हैं.. जबकि, भारत के पास 150 एटमी हथियार हैं।  चीन एटमी ताकत बढ़ाने में जुटा है.. इसके लिए जमीन, हवा और समंदर से हमला करने वाली नई मिसाइलें तैयार कर रहा है.. इतना ही नहीं, वो कुछ ऐसे फाइटर जेट्स भी तैयार कर रहा है जो एटमी हमला कर सके।

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