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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से हुए न्यूक्लियर समझौते को तोड़ने की धमकी दी है। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान के शासन को कट्टरपंथी बताते हुए उसकी निंदा भी की। ट्रंप ने न्यूक्लियर समझौते को तोड़ने की धमकी देते हुए कहा कि ईरान तेहरान समझौते का पालन नहीं कर रहा है। खबरों के मुताबिक ट्रंप ने 2015 में हुए ईरान के साथ एक न्यूक्लियर समझौते से समर्थन वापस लेने से संबंधित परामर्श के लिए कांग्रेस के पास प्रस्ताव भेजा है। साथ ही वह अपने सहयोगियों से भी सलाह मशविरा करेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने किया ट्रंप पर पलटवार-

एक तरफ जहां ट्रंप ने ईरान से न्यूक्लियर समझौते से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान कर रही है तो दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति ने  हसन रूहानी ने ट्रंप पर पलटवार किया। राष्ट्रपति रूहानी ने आज कहा कि उनके देश के खिलाफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रमक रणनीति यह दिखाती है कि अमेरिका परमाणु समझौते के अपने विरोध में अलग-थलग पड़ गया है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि, इस समझौते से ट्रंप अकेले नहीं हट सकते हैं, क्योंकि इस समझौते में कई देशों के हस्ताक्षर शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज जो भी सुना गया वे केवल बेबुनियाद आरोप हैं जिन्हें वे वर्षों से दोहरा रहे हैं। ईरान आपसे (अमेरिका) कुछ भी उम्मीद नहीं करता”। रूहानी  ने ईरान और विश्व की 6 शक्तियों के बीच ऐतिहासिक समझौते को खत्म करने की ट्रंप की धमकी को खारिज कर दिया है।

इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्य का हवाला देते हुए न्यूक्लियर समझौते को लेकर कहा कि, ईरान समझौते का पालन नहीं कर रहा है औप उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान न्यूक्लियर हथियार ना बना पाए।

इसके अलावा राष्ट्रपति ने कहा था कि, ईरान मौत, विनाश और हिंसा फैला रहा है। उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका किसी भी समय इस समझौते से अलग होने का अधिकार रखता है।

ट्रंप का यह कदम उनकी अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत देखा जा रहा है। इसके तहत ही उन्होंने पेरिस क्लाइमेट समझौते और ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप ट्रेड टॉक से अमेरिका को अलग कर लिया था।

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