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भारतीय बैंकों से नौ हजार करोड़ रुपये कर्ज लेकर ब्रिटेन भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की उम्मीद बढ़ गई है। यूके के गृह मंत्री साजिद जाविद ने विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है। जाविद ने सोमवार को माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर औपचारिक दस्तखत कर दिए। लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत ने 10 दिसंबर माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी थी। अदालत ने मामला ब्रिटिश सरकार को भेज दिया था।

माल्या ने देर रात ट्वीट कर कहा कि वह फैसले के खिलाफ अपील करूंगा। माल्या के पास अपील के लिए 14 दिन का वक्त है। वह लंदन के हाईकोर्ट में अपील कर सकता है।


केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट किया, “माल्या के प्रत्यर्पण का एक और रास्ता साफ हुआ। जबकि विपक्ष शारदा स्कैम के घोटालेबाजों के लिए रैलियां कर रहा है।”

भारत ने ब्रिटिश सरकार के फैसले का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हमें माल्या के भारत प्रत्यर्पण के आदेश पर ब्रिटेन के गृह मंत्री द्वारा हस्ताक्षर करने की जानकारी मिली है। हम ब्रिटिश सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही हम उसके प्रत्यर्पण के लिए कानूनी प्रक्रिया के जल्द पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।’

माल्या के खिलाफ क्या है केस?
विजय माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन वह जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा था। इस पर 10 दिसंबर 2018 को फैसला आया था।

माल्या को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) अदालत पिछले महीने भगोड़ा घोषित कर चुकी है। भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून-2018 के तहत माल्या पहला अपराधी है जिसे भगोड़ा घोषित किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसकी अपील की थी। माल्या की संपत्तियां जब्त करने को लेकर 5 फरवरी को सुनवाई होगी।

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