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पानी ही पानी आखिर जाएं तो कहां जाएं। घर में पानी, स्कूल में पानी, खेत में पानी। पेट की आग बुझाने के लिये कहीं सूखी जमीन नहीं जहां ये लोग खाना बना सके। पानी के सैलाब में उधम सिंह नगर स्थित बाजपुर के रमपुरा शाकर इलाके के गरीबों का सब डूब गया है। मूसलाधार बारिश से क्षेत्र के नदी नाले खेत खलियान सभी जलमग्न हो गए हैं। इनकी झोपड़ियां पानी की भेंट चढ़ चुकी है। हर तरफ तालाब का सीन है लेकिन कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। जलभराव से इन्सान से लेकर जानवर तक प्रभावित हुए हैं। मिट्टी के घरों में रहने वालों की कोई फिक्र एसी कमरे में बैठने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं है।

बाजपुर में बारिश से सैकड़ों एकड़ धान की फसल नष्ट

बारिश ने बाजपुर के सैकड़ों एकड़ धान की फसल नष्ट कर दी है। दर्जनों गांव को जोड़ने वाले रास्ते को पानी के सैलाब ने उसका अस्तित्व मिटा दिया है। स्कूल में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो चुकी है और प्रशासन बेखबर है।

त्रिवेंद्र सरकार के आपदा राहत मिशन पर सवाल

मौसम विभाग की मूसलाधार बारिश की चेतावनी सच साबित हुई है। उत्तराखंड के सभी क्षेत्र के नदी-नाले खेत और खलिहान जलमग्न हैं। वहीं बारिश गरीव लोगों के लिये मुसीबत का पहाड़ बनकर आई है। इन गरीब जनता का दुख-दर्द कोई सुनने वाला नहीं है चाहे वो शासन हो या प्रशासन। चूल्हा तक नहीं जलने से भुखमरी की नौबत

पीड़ितों को मदद के नाम पर केंद्र और उत्तराखंड सरकार दर्जनों योजनाएं चलाने के दावे करती हैं। लेकिन सरकारी मदद सरकारी फाइलों की लेटलतीफी जैसी ही चलती दिखाई दे रहीं हैं। कहने को उत्तराखंड सरकार के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत आपदा राहत चलाने के बड़े बड़े दावे करते हैं। लेकिन उधम सिंह नगर स्थित बाजपुर के रमपुरा शाकर इलाके में तो उसका सबूत नहीं दिख रहा।

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