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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिस किसी ने भी अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर के साथ पैदल चलते देखा वह हैरान रह गया । हर किसी के दिमाग में एक हीं सवाल उठ रहा था कि आखिर जिस प्रधानमंत्री के ऊपर जान का सबसे बड़ा खतरा है, वह आखिर ऐसे खुले में पैदल कैसे निकल पड़े हैं। प्रधानमंत्री करीब छह किलोमीटर पैदल चले । वाकई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर के साथ भीड़ के बीच इस कदर चलना जोखिम भरा था।

दरअसल, जब पीएम मोदी ने आखिरी समय में फैसला किया कि वह ‘स्मृतिवन’ तक पैदल जाना चाहते हैं तो सुरक्षा एजेंसियों के लिये बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। बीजेपी मुख्यालय में एसपीजी को जानकारी दी गई कि पीएम मोदी पैदल ही यह दूरी तय करेंगे और उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी होंगे। आनन-फानन में सुरक्षा एजेंसियाम अपने काम में लग गई । और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अचल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में उमड़ी  लाखों की भीड़ के साथ जब पीएम मोदी और अमित शाह पैदल चल रहे थे तो उनके आसपास आईबी के 600 लोग भी थे । इतना हीं नहीं  50 शार्पशूटर भी नजर गड़ाये हुए थे। और तो और, सादी वर्दी में दिल्ली पुलिस के जवान भी बीजेपी कार्यकर्ता के रूप उसी भीड़ में शामिल थे।

दरअसल जैसे हीं प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वह पार्थिव शरीर के साथ पैदल चलेंगे, तुरंत दिल्ली पुलिस के गुप्तचर तैनात कर दिये गये । सेना, अर्द्धसैनिक बलों की टीम ने दोनों ही नेताओं को अपने घेरे में ले लिया। आईबी (खुफिया) ने दिल्ली पुलिस के चुने हुये जवानों को सादी वर्दी और सफेद टोपी में कार्यकर्ताओं के तौर पर भीड़ में शामिल कराया ।जबकि एसपीजी की एक स्पेशल टीम ने घेरा बनाकर दोनों नेताओं को उसके अंदर शामिल कर लिया ।सादी वर्दी में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने एक मानव श्रृंखला बना कर दोनों नेताओं के अलावा एसपीजी के जवानों को अपने घेरे में ले लिया ।  एसपीजी ने स्मृति वन स्थल में सेना, नेवी और वायुसेना के जवानों को भी तैनात करा दिया ।.

वहीं बहादुरशाह जफर मार्ग और आसपास के इलाके में शार्पशूटर तैनात किये गये थे जो भीड़ पर नजर रखे हुए थे। वहीं एसपीजी के कहने पर शहीदी पार्क के पास पीएम मोदी कुछ मिनट के लिये गाड़ी के अंदर भी आ गये थे. इसके बाद दरियागंज सिग्नल पर पीएम मोदी फिर गाड़ी से बाहर आ गये।

राष्ट्रीय स्मृति स्थल की सुरक्षा को भी पांचों भागों में बांटा गया था. जिसकी जिम्मेदारी डीसीपी रैंक के अफसरों को दी गई थी. इसके बाद 12 जोन में बांटकर एसीपी तैनात किये गये. फिर जोन को 65 सेक्टर में बांटा गया और इनकी जिम्मेदारी इंस्पेक्टरों को दी गई. कुल 14 एसीपी, 67 इंन्सपेक्टर, 233 उच्च और 1084 उसके नीचे का स्टाफ लगाया था.  दिल्ली पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बलों और रिजर्व पुलिस की 9 कंपनियां तैनात की गई थीं।

—एपीएन ब्यूरो

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