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कौन हैं Damodar Mauzo? जिन्हें मिला है ज्ञानपीठ पुरस्कार

Konkani के साहित्यकार Damodar Mauzo को वर्ष 2022 के लिए प्रतिष्ठित Jnanpith award प्रदान किया गया है। भारतीय ज्ञानपीठ ने मंगलवार को बताया, “ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन समिति ने वर्ष 2021 – 2022 के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा कर दी है।”

कौन है दामोदर माऊज़ो ?

दामोदर माऊज़ो का जन्म 1 अगस्त 1944 को हुआ था। उन्होंने अपना प्राथमिक शिक्षा मराठी भाषा में किया। उन्होनें R.A Podar College से स्नातकत वाणिज्य विभाग से किया। उनके येगदान के कारण कॉलेज में उन्हें NCC का अधिकारी चुना गया था।

साहित्य

1963 में उन्होनें अपनी पहली कथा लिखी जो All India Radio, Mumbai पर प्रस्तूत किया। इसके बाद उनके लेखन का सफर शुरु हो गया। इन्होनें कहानियां, उपन्यास, बच्चों के कहानी पुस्तक और जीवनी भी लिखी है। इन्होनें चार मशहुर कहानियाँ गानथन (1971), जागराना(1971), रुमादफूल (1989), भुरगी मुगेली ती (2001) लिखी। तीन उपन्यास कार्मेलिन(1981), सूड (1975), सुनामी साइमन(2001), एक आशिल्लो बाबुल (1977) बच्चों का उपन्यास, बाल कहानियों के संग्रह चीतरंगी(1993) और साथ ही दो जीवनी ओशे घोडलेम शैनोय गोयबाब (2003) और उच हावेस उच माथेन (2003) लिखी है।

इनकी कुछ कहानियों का अनुवाद

कार्मेलिन को हिन्दी, मराठी, कन्नड, बंगाली, अंग्रेजी, पंजाबी, सिंधी, तमिल, उड़िया और अन्य भाषाओं में साहित्य को बदला है। दे आर माय चीलड्रन के अंग्रेज़ी बाल कहानियों के संग्रह का दिल्ली में अनुवाद किया। साथ ही सुनामी सायमन को अंग्रेजी में अनुवाद भी किया है।

पुरस्कार

  1. 1983 में उपन्यास कार्मेलिन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार कोंकणी से सम्मानीत हुआ।
  2. दो बार कोकणी भाषा मंडल पुरस्कार
  3. दो बार गोवा कला अकाडमी पुरस्कार
  4. जनगंगा पुरस्कार से सम्मानीत
  5. गोवा प्रदेश सांस्कृतिक पुरस्कार
  6. विश्व कोकणी केन्द्र साहित्य पुरस्कार

और अब इन्हें देश के सबसे बड़े साहित्य के पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

क्या है ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith award) ?

Jnanpith award भारतीय ज्ञानपीठ भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। भारत का कोई भी नागरिक जो सूची में बताई गई 22 भाषाओं में से किसी भाषा में लिखता है तो वो इस पुरस्कार के योग्य है। पुरस्कार में ग्यारह लाख रुपये की धनराशि, प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा दी जाती है।  प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम लेखक G. Sankara Kurup को प्रदान किया गया था। उस समय पुरस्कार की धनराशि 1 लाख रुपए थी।  

प्रख्यात मलयाली कवि Akkitham Achuthan Namboothiri को 55वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ज्ञानपीठ चयन बोर्ड ने उनका चयन वर्ष 2019 के ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिये किया था।

अब तक हिन्दी तथा कन्नड़ भाषा के लेखक सबसे ज्यादा यह पुरस्कार ले चुके हैं।

यह भी पढ़े:-Happy Birthday Dharmendra: 86 साल के हुए धर्मेंद्र, जानें उनके जीवन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

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