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सीरिया में तुर्की के हमलों का असर लाखों लोगों पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में दावा किया था कि हमलों की वजह से 1 लाख 60 हजार लोग विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं। जबकि, कई आम नागरिकों की हमले में मौत हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन से चिट्ठी में कहा आप हजारों लोगों के नरसंहार के जिम्मेदार नहीं बनना चाहेंगे और मैं तुर्की की अर्थव्यवस्था को बरबाद करने वाला नहीं बनना चाहता। लेकिन मैं ये करूंगा। अगर विवाद का निपटारा मानवतावादी तरीके से हुआ तो इतिहास तुम्हें अच्छे नेता के तौर पर देखेगा। लेकिन अच्छी चीजें नहीं हुईं तो तुम्हें शैतान की तरह याद रखा जाएगा। इसलिए मुश्किल आदमी मत बनो, बेवकूफ मत बनो। मैं तुम्हें बाद में फोन करूंगा

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दूसरी ओर खबर ये भी है कि तुर्की पर प्रतिबंधों के ऐलान के बाद से ही एर्दोआन ट्रंप से नाराज हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो उनसे बातचीत के लिए तुर्की पहुंचे। पहले तो एर्दोआन ने उनसे मिलने से ही मना कर दिया। हालांकि, बाद में उन्होंने बयान वापस ले लिया। इस घटनाक्रम को अमेरिका और तुर्की के बीच पैदा हो रही खटास से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन को सीरिया में कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाने की अनुमति देने की बात से बुधवार को इनकार किया। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति एर्दोआन के फैसले ने मुझे चौंकाया नहीं क्योंकि वह काफी समय से ऐसा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि वह काफी समय से सीरिया से लगी सीमा पर सैनिक तैनात करना चाहते थे।

मुश्किल वक्त में सीरिया से अमेरिकी सेना की वापसी पर ट्रंप को अब अपनी रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों भी विरोध झेलना पड़ रहा है। संसद में ट्रंप के फैसले पर निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। इसे 354 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि सिर्फ 60 सांसदों ने ही इसका विरोध किया। माना जा रहा है कि रिपब्लिकन नेता जल्द ही नाटो सेना के साझेदार तुर्की पर और कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश करेंगे।

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