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अमेरिकी सांसदों ने पहली बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया। अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटिव्स ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में 232 वोट पड़े, जबकि विरोध में 196 वोट डाले गए। महाभियोग लगाने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी को सभा में बहुमत मिला। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने विरोधी जो बिडेन और उनके बेटे के खिलाफ यूक्रेन की गैस कंपनी में भ्रष्टाचार के मामले में जांच के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था।

महाभियोग प्रस्ताव में खुफिया मामलों की समिति के प्रमुख एंड स्किफ के नेतृत्व में सार्वजनिक जांच करने की बात कही है। समिति के अध्यक्ष मैक्गवर्न ने कहा कि उसके पास राष्ट्रपति द्वारा ताकत का गलत इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया से समझौता करने के पुख्ता सबूत हैं। इसके अलावा सदन की चार समितियों का कहना है कि उन्होंने जांच के दौरान सबूत और बयान इकट्टा किए गए हैं जिन्हें जल्दी अमेरिकी जनता के सामने लाया जाएगा, साथ ही कहा कि इन सबूतों से ये साफ हो जाएगा कि ट्रंप ने ताकत का दुरुपयोग 2020 के अमेरिकी चुनावों में फायदे के लिए किया है।

प्रतिनिधि सभा की छह समितियां राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग के मामले की जांच करेंगी.. इसके अलावा अगर मामला ज्यादा ही मजबूत पाया गया तो इसे न्यायिक समिति के पास भेजा जाएगा। अगर जांच में ट्रंप के खिलाफ सबूत नहीं मिले तो वो अपने पद पर बने रहेंगे और सबूत मिल गए तो प्रतिनिधि सभा महाभियोग प्रक्रिया की विभिन्न धाराएं लगाने के लिए संसद में वोटिंग कराएगी। महाभियोग के पक्ष में ज्यादा वोट आए तो प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर सीनेट के पास भेजा जाएगा जहां धाराओं की सुनवाई होगी, फिर ट्रायल में सीनेट ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए वोटिंग कराएगी। सीनेट की इस वोटिंग में ट्रंप के पक्ष में दो तिहाई से कम वोट पड़े, तो ट्रंप पद पर बने रहेंगे और वोट ज्यादा पड़े, तो ट्रंप को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी।

ट्रंप को पद से हटाने के लिए 20 रिपब्लिकन सांसदों को अपने ही राष्ट्रपति के विराध में वोट डालने होंगे। हालांकि इसकी संभावना कम है क्योंकि ट्रंप रिपब्लिकन से ही राजनीति में हैं। अभी तक अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग प्रक्रिया से नहीं हटाया गया है।  इससे पहले अमेरिका के 17वें राष्ट्रपति एंड्रयू जॉन्सन और 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया चली थी, पर सफल नहीं हो पाई थी और दोनों अपने पद पर बने रहे थे।

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