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यशवंत सिन्हा बीजेपी में काफी समय बिताने के बाद पार्टी से अलग हो गए हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र खतरे में है। दरअसल, यशवंत सिन्हा बीजेपी कार्यकाल में हो रहे हत्याओं और जुर्म से काफी दुखी हैं। बढ़ रहे क्राइम और कट्टरता से यशवंत सिन्हा बीजेपी को दोषी मानते हैं। यशवंत सिन्हा ने पार्टी छोड़ते वक्त कहा कि मैं बीजेपी के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त कर रहा हूं। आज से मैं किसी भी तरह की पार्टी पॉलिटिक्स से भी संन्यास ले रहा हूं।’ सिन्हा ने पटना में अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है। मैं राजनीति से संन्यास ले रहा हूं, लेकिन आज भी दिल देश के लिए धड़कता है।

यशवंत सिन्हा करीब चार सालों से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कदमों से अपना विरोध जता रहे थे। यशवंत सिन्हा के पार्टी छोड़ने पर बीजेपी ने कहा है, ‘यशवंत सिन्हा कांग्रेस के कार्यकर्ता की तरह बात करते रहे हैं। लग रहा है कि एक स्वार्थी राजनेता की तरह वह पार्टी के बजाए अपने लिए काम करते रहे हैं। अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने वाले अब कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं।’ बता दें कि यशवंत सिन्हा मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करने को कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे। उन्‍होंने कहा कि मैं चुनावी राजनीति से भी संन्‍यास ले रहा हूं। उन्‍होंने कहा कि बीजेपी से सारे रिश्‍ते तोड़ रहा हूं।  सिन्हा ने ये घोषणा अपने शहर पटना में राष्ट्र मंच द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की। यशवंत सिन्‍हा ने बेटे के जन्‍मदिन वाले दिन पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।

यशवंत सिन्हा देश के वित्त मंत्री रह चुके हैं। वह 1998 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री थे। यही नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 1990 से 1991 तक चली सरकार में भी वह वित्त मंत्री थे। सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्ट्र मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा।

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