उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी तरह एक्शन में है। सरकार रिक्त स्थानों को भर रही है। राजनीति में बराबर का अवसर देने के लए पुरजोर कोशिश जारी है। अब सरकार ने फैसला किया है कि प्रधान के करीबी ग्राम रोजगार सेवकों को हटा दिया जाए।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवक यदि नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान के निकटतम संबंधी अथवा परिवार से काम करने वालों को हटाने की तैयारी कर रही है।

इन पंचायतों में नए रोजगार सेवक का चयन किया जाएगा।  अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह ने ऐसे ग्राम रोजगार सेवकों को हटाने का निर्देश जिलों के जिलाधिकारी और जिला कार्यक्रम संयोजक को दिए हैं। 

अहम बात यह है कि पुराने रोजगार सेवक को सरकार नहीं हटाएगी। पुराने ग्राम रोजगार सेवक के अनुभव का लाभ लेने के लिए उन्हें पास के किसी ग्राम पंचायत में वहां की पंचायत की सहमति से की जा सकती है।

आपसी सहमति से दो ग्राम पंचायतें भी अपने ग्राम रोजगार सेवकों का परस्पर स्थानांतरण जनपद स्तरीय अधिकारी को प्रस्ताव भेज कर और प्रस्ताव पर सहमति लेकर कर सकती हैं। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में नव-निर्वाचित कई ग्राम प्रधानों के निकट परीवार के लोग मनरेगा योजना के तहत ग्राम रोजगार सेवक के पर पर तैनात हैं, जिससे विभागीय कार्यों की पारदर्शिता तथा गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाला है। 403 सीटों पर होने वाले इस चुनाव के लिए पार्टियां तैयार हैं। वहीं बीजेपी सरकार रुके हुए सभी कामों को पूर्ण करने में जुटी हुई है।

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वहीं खबर है कि जुलाई के अंत तक राज्य में कैबिनेट विस्तार हो सकता है। योगी सरकार युवा चेहरों को कैबिनेट में जगह दे सकती है। यही कारण है कि राजनीति में परिवारवाद को खत्म करने की कवायद चल रही है।

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